Thursday, 8 December 2011

खयालों में.....

क्या आपने कभी इस चीज़ का अनुभव किया है कि सुबह-सुबह जिस गानें को सुन लो तो उसी गानें के बोल बार-बार आपकी जुबान पर तब तक आती रहेगी जब तक रात में आपकी नींद न पड़ जाए . बिल्कुल इसी तर्ज़ पर आज मै दिनभर उन वाक्यों के विचार में डुबा रहा जिसे मैंने सुबह ट्रक के पिछवाड़े में लिखा हुआ पढ़ लिया था . हुआ यूँ कि आज जब मै सुबह अपनी मजदूरी में जाने निकला तो देरी की वज़ह से बाइक कि रफ्तार औसत से कहीं अधिक हो गई थी .तक़रीबन एक किमी. का फासला तय कर पाया था कि सामने उसी दिसा में फर्राटे भरता एक ट्रक दिखा . उसके पिछले हिस्से में " बुरी नज़र वाले , नसबंदी करवा ले " लिखा था . यकायक मेरी नज़र उस वाक्य पर पड़ गई . पढ़ा और ओवरटेक कर आगे निकल गया . कुछ ही दूर गया था कि एक डब्लू बी सिरीज़ का दूसरा ट्रक दिखा . इसके पीछे " न नज़र बुरी और न दिल काला , हो सबका भला " लिखा मिला . पढ़कर आगे निकला और चंद समय बाद मै अपने गंतव्य तक पहुँच भी गया. मै अपनी दिनचर्या में व्यस्त ज़रूर हो गया पर दिनभर इन वाक्यों के "अच्छे-बुरे " विचारों में खो जाने मै मज़बूर हो गया .

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