Wednesday, 7 December 2011

बनाने के लिए बिगाड़ने की जुगत ...

लोगों का आना -जाना जारी था. चूँकि मोहारा रोड में यातायात की व्यस्तता रहती है, अतः छोटी-बड़ी गाड़ियों की लाइन लगी रहती है. इस रोड को दिन-दहाड़े बंदकर निर्माण में लगे लोग अपना काम करने लगे थे. रोड के दोनों तरफ गाड़ियों की लम्बी लाइन लग चुकी थी. एक कई दांतों की लम्बी चोंच वाली विशालकाय मशीन , रोड किनारे के पेड़ को गिराने में जुटी थी. कितना ही बल लग रहा था पर पेड़ गिरने का नाम ही नहीं ले रहा था, इसका कारण यह सामने आया कि काटने वालों ने उसके तनें को पर्याप्त और बराबर नहीं काटा था. तब तक लोग दोनों ओर फंसे हुए थे. करीब घंटे भर तक जब पेड़ धराशाही नहीं हो पाया तो लोग चिल्लाने लग गए थे. रात का काम दिन में कर, लोगों को रोके रखना किसी को गवारा नहीं था. भीड़ में मै भी फंसा था. कई घोड़ों की शक्ति वाली मशीन से पेड़ गिराने का प्रयास देख मै सोंचने लगा था कि राजा-रजवाड़े के समय असली घोड़ों की ताकत " अश्व शक्ति " का इस्तेमाल होता था, यही " अश्व शक्ति " अब " हार्स पावर " में बदल चुकी है . एक मशीन में कई घोड़ों की शक्ति समाई हुई है.

No comments:

Post a Comment