Thursday, 8 December 2011

गणेश जी का मूषक काला या सफ़ेद ?

बीते कई दिनों से आसमान में ना सिर्फ बादल छाये हुए है अपितु रोज़ झमाझम बारिश भी हो रही है . शुक्रवार को जब मै सो कर उठा तो घडी में नौ के घंटे बज रहे थे, लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे अभी सूरज निकलने ही वाला है. मै बिस्तर से उठ भी नहीं पाया था और बाहर तेज़ पानी गिरने की आवाज़ आई. एक ओर ...जहाँ बाहर बारिश हो रही थी तो दूसरी ओर घर के अन्दर मेरा छह साल का बच्चा " आर्यन " सवालों की बौछार करने लगा था. ' गणेश जी के पापा का नाम क्या है , उनकी मम्मी दुर्गा माँ है क्या, गणेश भगवान सिर्फ लड्डू खाते हैं , उनकी मम्मी उन्हें और कुछ नहीं देती.' जैसे ढेरों सवालों का यथायोग्य ज़वाब उसे मिलाता रहा. जब मै बाथरूम की ओर जाने लगा तभी " पापा...पापा...एक बात और " कहने लगा. अब की बार मैंने उसे डांट लगाई ( स्वाभाविक है , इस समय मै डबल टेंशन में था सो .......आप सब समझ रहे होंगे. ) मैंने कहा - ' जल्दी बोलो.' बच्चा कहने लगा - " पापा, गणेश जी का चूहा काला है कि सफ़ेद ? " मैंने काला बता कर तत्कालीन अपना पल्ला झाड़ते हुए सीधे फ्रेश होने बाथरूम में प्रवेश किया. मै सोंचने लगा था कि आखिर ये अचानक ढेरों सवाल क्यों करने लगा है ? जब मै नहा कर आया तो मेरे बच्चे ने मुझे गणेश जी का दर्शन करवाया, तब सवालों की वज़ह समझ में आई. दरअसल वह रायपुर से प्रकाशित प्रतिष्ठित समाचार पत्र " नव भारत " की पत्रिका
' यंग वर्ड ' के कालम " माय पेंट ब्रश " तहत प्रकाशित गणेश जी के चित्र में रंग भरना चाह रहा था.

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