Friday, 27 March 2015

" पालक का पेट भरती चिडिया "



भक्तिभाव का माहौल था। देवी भक्तिगीत की गूंज हो रही थी। नारियल,अगरबत्ती, लाल चूनरी, से लेकर देवी साजो-सामान की दुकानें कतारबद्ध सजी हुई थी। बीच-बीच में 'चइय्या...चइय्या, दो में एक फ्री.....दो में एक फ्री., देखिए जादू....पलक झपकते ही लड़की गायब, आओ-आओ...खाओ-खाओ, बनारस का पेड़ा टाइप की आवाजों से भरी भीड़ थी। " एक छोटा बच्चा नीली जिंस और काली टी शर्ट पहने मिला है, अपना नाम विपिन और पिता का नाम रामसेवक ही बता पा रहा है। इस बच्चे के माता-पिता या पहचानकर्ता पुलिस सहायता केन्द्र, नीचे मंदिर डोंगरगढ़ से संपर्क करें....!!!"  का एनाउन्स भी ध्वनि विस्तारक यंत्र के माध्यम से होता रहा। विक्रय किये जाने वाले विभिन्न पदार्थों के विज्ञापन की तेज आवाजों से भरी भीड़ का हिस्सा मै भी था। मैने भीड़ में देखा कि कुछ पुलिस वाले दो युवकों को पकड़कर पीटते हुए ले जा रहे थे। एक जवान ने बताया कि ये साले शातिर हैं और भीड़ का फायदा उठाते हुए देवी दर्शनार्थियों की जेबें टटोल रहे थे। ये नजारा देख मैं आगे बढ़ा। पीछे से आने वाली आवाज " सोंचा काम बनेगा कि नहीं...,नौकरी... ग्रहदशा  की जानकारी....यहां तक कि उपाय में कौन सा यंत्र लगेगा...भी बतायेगी चिड़िया...!!!"  सुनकर मेंरे कदम ठिठक गये। मैने देखा कि बाजार में पसरा लगाये सरीखे बैठा एक आदमी था। सामने दर्जनों की संख्या में कार्ड भरे लिफाफे क्रमावार सजे थे। पिंजरे में दो चिड़िया थी और 10 रूपये चढ़ाने वालों की किस्मत का ताला उन्हीं चिड़िया में से एक से खुलवाया जा रहा था। रूपये चड़ाकर अपना नाम बताने वाले की सही-सही राशि वाले कार्ड से भरा लिफाफा अपनी चोंच में पकड़कर वह चिड़िया अलग कर देती थी। " कहीं गलती तो नहीं हो रही है, इनके नाम की राशि वाला कोई दूसरा कार्ड तो नहीं है...!!! "  पसरे वाले के सवाल पर चिड़िया फिर से वहीं लिफाफा थमाती जा रही थी। इसे वह ज्योत्षी चिड़िया कहता था। देखिए ‘यामा पक्षी' का कमाल भी चिल्लाते जा रहा था। बड़ा रोमांचक भी लग रहा था। मै यही सोचते हुए आगे बढ़ गया कि " चलो बेचारा आखिर कोई पाप तो नहीं कर रहा है, धर्म और आस्था के नाम पर किसी की अस्मत तो नहीं लूट रहा है, समोसा, भजिया, लाल और हरी चटनी भरोसे कृपा रूकना और कृपा आने की बेफिजूल बातों से लोगों को बेवकूफ तो नहीं रहा है, यहां तो इंसान, इंसान को खाना नहीं देता, एक चिडि़या  किसी का पेट भर रही है तो इसमें बुराई क्या है...??? "

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