Sunday, 27 November 2011

सादगी में खूबसूरती की झलक......


न डोली सजी...,न मंडप सजा ....और न दुल्हन के लहंगे के बार्डर से मैच कराती दुल्हे की शेरवानी दिखी .....दुल्हन का लिबास भी कहीं नज़र नहीं आया पर यह जान लीजिए कि मेहमान को फूलों के गलीचे बिछाकर स्वागत करने कि सामर्थ्यहीनता के बावजूद बबूल के इस ठूंठ ने ना सिर्फ अपना सीना चौड़ा किया अलबत्ता बादलों को हरकारा भी बनाया. मकड़ीरानी की स्थिति बिल्कुल उस कन्या सरीखी थी जिसे मायके से ससुराल जाने के बाद अनजाने माहौल में नए रिश्तों को बनाने की चुनौती स्वीकार करनी पड़ती है. मकड़ीरानी ने ना सिर्फ ऐसी चुनौती स्वीकारी अपितु खूबसूरती बिखेरकर यह साबित कर दिया है कि सादगी में भी सुन्दरता बसती है. डूबते सूरज की किरणों ने इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा दिया है. देवरी-बालोद रोड का यह दृश्य मेरी आँखों को भा गया और इसे शब्दरूप देने मै उद्यत होने मजबूर हो गया.

No comments:

Post a Comment