Thursday, 19 March 2015

" ...और चेहरों पर पड़ने लगी फुहार ! "

सुबह-सुबह चाय पीकर निकल गया था ! रास्ते मे भूख लगने लगी ! नदी पार के एक होटल में साँभर-बडा खा रहा था तभी एक बस आकर रुकी ! बस से दर्जनों लड़के - लड़कियाँ उतरे, जाहिर है जलपान उन्हें भी करना था ! जिसकी जो रुचि, सब खाने लगे ! आई बस थी तो स्कूल की पर बच्चे काँलेज के थे ! अचानक मेरी नजर खडे बाल वाले लड़के पर पड़ी, मैने जेब से झट मोबाईल निकाल क्लिक कर लिया ! मुझसे रहा नहीं गया, मैने मजाकिया लहजे मे उनसे पूछ ही लिया कि " भाई, कटिंग कहां करवाई आपने, सेलुन वाले को पैसा नहीं देना था, पूरा बाल शुतुरमुर्ग की झांपी बना कर रख दिया है ! " इतने में वहां न सिर्फ़ ठहाके गूंजे बल्कि एक लड़की ने पानी पीते, हँसते-हँसते अटककर कइयों के चेहरे में फुहार तक लगा दी ! हँसी-ठट्ठा का क्रम यहीं नहीं थमा ! उनके साथ वालों में से एक ने कहा- " ये रात को खुले में सो गया था जी, किसी ने इसके सिर मे रसगुल्ले की चाशनी उडेल दी है ! खड़े बाल वाला शुरु में तो मुझे घूरने लगा था पर जब मैने फिर पूछा- " जेली लगाकर बाल खड़े करते हो क्या....??? " तो वो भी खलखलाये बिना नहीं रह सका !

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